सवाई माधोपुर में लैंगिक हिंसा की रोकथाम को लेकर दो दिवसीय प्रशिक्षण, पीड़ितों को त्वरित सहायता और संरक्षण पर जोर..
एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी ने कहा—हिंसा से प्रभावित महिलाओं एवं बालिकाओं की गरिमा, सुरक्षा और गोपनीयता सर्वोच्च प्राथमिकता
विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कार्मिकों को दिया प्रशिक्षण, समन्वित कार्रवाई से सहायता व्यवस्था मजबूत बनाने पर बल
गौरव रक्षक/ राजेंद्र शर्मा
सवाई माधोपुर, 11 अक्टूबर2026
लैंगिक आधारित हिंसा की रोकथाम तथा हिंसा से प्रभावित महिलाओं एवं बालिकाओं को समयबद्ध, संवेदनशील और प्रभावी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 8 एवं 9 अक्टूबर को सवाई माधोपुर में दो दिवसीय जिला स्तरीय क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। पुलिस अधीक्षक ज्येष्ठा मैत्रेयी के आतिथ्य में आयोजित इस प्रशिक्षण में विभिन्न विभागों एवं संबंधित संस्थाओं के अधिकारियों और कार्मिकों को लैंगिक हिंसा से जुड़े मामलों में समन्वित कार्रवाई, पीड़ितों को संरक्षण तथा आवश्यक सहायता सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया।
पीड़ितों की गरिमा और गोपनीयता सर्वोपरि
प्रशिक्षण के दौरान लैंगिक आधारित हिंसा के विभिन्न स्वरूपों, उनके कारणों, प्रभावों और रोकथाम के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही, हिंसा की पहचान, शिकायत प्राप्त होने पर त्वरित कार्रवाई, पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान करने और उन्हें संबंधित सहायता सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।

एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी ने कहा कि हिंसा से प्रभावित महिलाओं एवं बालिकाओं के साथ व्यवहार करते समय उनकी गरिमा, सम्मान और गोपनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पीड़ित की बात संवेदनशीलता से सुनना, उसे अनावश्यक मानसिक परेशानी से बचाना तथा आवश्यकता के अनुसार उचित सहायता एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराना संबंधित अधिकारियों और कार्मिकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
विभिन्न विभागों के बीच समन्वय पर विशेष जोर
प्रशिक्षण में पुलिस, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, वन स्टॉप सेंटर, महिला अधिकारिता विभाग, महिला सुरक्षा एवं सलाह केंद्रों, सखी केंद्रों, सेवा प्रदाता संस्थाओं, पन्नाधाय महिला सुरक्षा एवं सम्मान केंद्रों तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर चर्चा की गई।
इसके अतिरिक्त घरेलू हिंसा से संबंधित व्यवस्थाओं, बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों और महिला एवं बाल संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं की जिम्मेदारियों पर भी प्रकाश डाला गया। बाल कल्याण समिति, विशेष किशोर पुलिस इकाई, जिला बाल संरक्षण इकाई तथा किशोर न्याय बोर्ड सहित संबंधित संस्थाओं के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता रेखांकित की गई।
प्रशिक्षण में बताया गया कि लैंगिक हिंसा के मामलों में पीड़ितों को समुचित सहायता उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समय पर सूचना का आदान-प्रदान, त्वरित कार्रवाई और आवश्यकतानुसार संबंधित संस्थाओं से संपर्क स्थापित करना बेहद जरूरी है।
कानूनी प्रावधानों और पीड़ितों के अधिकारों की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान लैंगिक आधारित हिंसा से संबंधित कानूनी प्रावधानों, पीड़ितों के अधिकारों और विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी दी गई। अधिकारियों एवं कार्मिकों को कानून के अनुरूप कार्रवाई करने के साथ ही पीड़ित की सुरक्षा, सम्मान और निजता बनाए रखने के प्रति संवेदनशील रहने की आवश्यकता बताई गई।

विशेषज्ञों एवं प्रशिक्षकों ने विभिन्न परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली कार्यप्रणाली पर मार्गदर्शन देते हुए पीड़ितों को उपलब्ध संरक्षण एवं सहायता सेवाओं तक समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करने पर बल दिया।
जागरूकता से मजबूत होगा महिलाओं और बालिकाओं का संरक्षण
प्रशिक्षण में महिलाओं एवं बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने, उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने तथा हिंसा की स्थिति में बिना किसी भय या संकोच के सहायता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
इसके साथ ही पीड़ितों को तत्काल सहायता, संरक्षण, उचित मार्गदर्शन और संबंधित सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा की गई, ताकि जरूरतमंद महिलाओं एवं बालिकाओं को समय पर आवश्यक सहयोग मिल सके।
सामूहिक जिम्मेदारी से सुरक्षित समाज की दिशा में पहल
दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में चर्चा, अनुभव साझा करने और विभिन्न परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली कार्यप्रणाली के माध्यम से अधिकारियों एवं कार्मिकों की क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लैंगिक आधारित हिंसा की रोकथाम के साथ प्रभावित महिलाओं एवं बालिकाओं को समय पर सहायता और संरक्षण उपलब्ध कराना तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना रहा। प्रशिक्षण के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा अन्य संबंधित संस्थाओं की सामूहिक जिम्मेदारी है। समन्वित प्रयासों से ही महिलाओं एवं बालिकाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और हिंसा-मुक्त वातावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।

