खेल कोटे से सरकारी नौकरी दिलाने का फर्जीवाड़ा: जयपुर का पूर्व ताइक्वांडो अकादमी संचालक गिरफ्तार, खाली सर्टिफिकेट बेचकर रचा था खेल…

खेल कोटे से सरकारी नौकरी दिलाने का फर्जीवाड़ा: जयपुर का पूर्व ताइक्वांडो अकादमी संचालक गिरफ्तार, खाली सर्टिफिकेट बेचकर रचा था खेल…

गौरव रक्षक/राजेंद्र शर्मा

जयपुर, 31जुलाई 2026

राजस्थान में खेल कोटे के माध्यम से सरकारी शिक्षक भर्ती में फर्जी ताइक्वांडो प्रमाण-पत्रों का इस्तेमाल कर नौकरी दिलाने वाले गिरोह के खिलाफ स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में एसओजी ने जयपुर निवासी और पूर्व ताइक्वांडो अकादमी संचालक बालकंवर सैनी (33) को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने पैसे लेकर हस्ताक्षरित खाली खेल प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराए, जिनका बाद में दुरुपयोग कर फर्जी सर्टिफिकेट तैयार किए गए।
एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस विशाल बंसल के अनुसार वर्ष 2021-22 की तृतीय श्रेणी अध्यापक (लेवल-1) भर्ती में खेल कोटे से चयनित कुछ अभ्यर्थियों के ताइक्वांडो प्रमाण-पत्र संदिग्ध पाए गए थे। जांच में सामने आया कि फर्जी खेल प्रमाण-पत्रों के साथ ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया, धनबाद के नाम से बनाई गई फर्जी ई-मेल आईडी के जरिए नकली सत्यापन रिपोर्ट भी तैयार की गई, जिसके आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का प्रयास किया गया।
जांच में खुलासा हुआ कि इससे पहले गिरफ्तार आरोपी सियाराम गुर्जर ने फर्जी ताइक्वांडो प्रमाण-पत्र के आधार पर शिक्षक की सरकारी नौकरी हासिल की थी। पूछताछ में सामने आया कि कप्तान सिंह ने उससे 40 हजार रुपये लेकर फर्जी प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया था। वहीं, उसने अपने रिश्तेदार के कहने पर विष्णु भाखड़ीवाल से करीब 60 हजार रुपये देकर मुद्रित प्रमाण-पत्र प्राप्त किए और बाद में अभ्यर्थियों से रकम वसूली।
एसओजी के अनुसार वर्ष 2017 में बालकंवर सैनी जयपुर में ताइक्वांडो अकादमी संचालित करता था। उसी दौरान राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित ओपन ताइक्वांडो प्रतियोगिता के बाद उसके पास राजस्थान ताइक्वांडो एसोसिएशन के हस्ताक्षर वाले चार खाली प्रमाण-पत्र रह गए। बाद में ये प्रमाण-पत्र विष्णु भाखड़ीवाल और कप्तान सिंह तक पहुंचे, जिन्होंने उन्हें भरकर फर्जी खेल प्रमाण-पत्र तैयार किए और मोटी रकम वसूली। आरोप है कि इस सौदे में बालकंवर सैनी को करीब 20 हजार रुपये मिले थे।
एसओजी ने बालकंवर सैनी को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क की जांच तेज कर दी है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी खेल प्रमाण-पत्रों के जरिए अब तक कितने लोगों ने सरकारी नौकरी हासिल की या उसका प्रयास किया। मामले में आगे की जांच जारी है।

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