राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 साल पुरानी एफआईआर समझौते के आधार पर की निरस्त…
गौरव रक्षक/ राजेंद्र शर्मा
जयपुर, 26 फरवरी , 2026
राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने वर्ष 2012 में दर्ज एक आपराधिक एफआईआर एवं उससे संबंधित लंबित आपराधिक कार्यवाही को पक्षकारों के बीच हुए आपसी समझौते के आधार पर निरस्त कर दिया है। यह आदेश माननीय न्यायमूर्ति भुवन गोयल द्वारा एस.बी. क्रिमिनल मिक्स. पिटीशन संख्या 1065/2026 में पारित किया गया।
मामले में याचिकाकर्ता रेखा रानी एवं घनश्याम बेरवा ने प्रताप नगर थाना, जयपुर (पूर्व) में दर्ज एफआईआर संख्या 317/2012 को रद्द करने के लिए याचिका दायर की थी। उक्त एफआईआर भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420, 453, 467, 468, 471 एवं 120-बी के तहत दर्ज की गई थी।
पुलिस जांच के बाद आरोप-पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था तथा ट्रायल कोर्ट द्वारा धारा 420/120-बी एवं 453/120-बी के तहत आरोप तय किए गए। यह प्रकरण वर्ष 2014 से अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश एवं महानगर मजिस्ट्रेट संख्या-7, जयपुर महानगर-प्रथम की अदालत में लंबित था।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता श्री भारत सिंह ने पैरवी की, जबकि परिवादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता श्री विकास सोमानी ने न्यायालय को अवगत कराया कि दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हो चुका है और परिवादी अब अभियोजन नहीं चलाना चाहता। राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता ने धारा 453/120-बी को गैर-समझौतायोग्य बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने Gian Singh v. State of Punjab तथा Ramgopal v. State of Madhya Pradesh के निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि विवाद निजी प्रकृति का हो और पक्षकारों के बीच समझौता हो चुका हो, तो उच्च न्यायालय अपनी अंतर्निहित शक्तियों का उपयोग करते हुए आपराधिक कार्यवाही निरस्त कर सकता है।
अदालत ने आदेश में कहा कि प्रताप नगर थाने की एफआईआर संख्या 317/2012 एवं उससे संबंधित आपराधिक मामला संख्या 936/2014 (स्टेट बनाम रेखा रानी व अन्य) को समझौते के आधार पर निरस्त एवं समाप्त किया जाता है। साथ ही, मामले से जुड़े सभी लंबित आवेदन भी निस्तारित कर दिए गए।

