राजस्थान में अब हाइटेक होगी बीट पुलिसिंग, 9 जिलों से होगी नई व्यवस्था की शुरुआत, राजस्थान पुलिस और BPR&D के बीच हुआ महत्वपूर्ण एमओयू…
बीट पुलिसिंग को तकनीक, डेटा और जनसहभागिता से बनाया जाएगा अधिक प्रभावी और जवाबदेह
राजकॉप ई-बीट बुक, जियो-मैपिंग और डिजिटल प्रोफाइलिंग से होगी बीट की निगरानी
गौरव रक्षक/राजेंद्र शर्मा
जयपुर, 5 अक्टूबर,2026
राजस्थान में बीट पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, जवाबदेह, जनोन्मुखी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में राजस्थान पुलिस ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सोमवार को पुलिस मुख्यालय, जयपुर में राजस्थान पुलिस और ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPR&D), गृह मंत्रालय, भारत सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
यह पहल डीजीपी/आईजीपी कांफ्रेंस-2025 की सिफारिशों के अनुरूप तैयार किए गए एक वर्षीय एक्शन प्लान के तहत की जा रही है। इसके प्रथम चरण में प्रदेश के 9 जिलों का चयन कर नवीन बीट प्रणाली लागू की जाएगी। प्रथम चरण के अनुभव और नवाचारों के आधार पर इसे बाद में प्रदेश के शेष जिलों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
बीट ही पुलिसिंग का बेसिक है : आलोक मित्तल
एमओयू पर हस्ताक्षर के अवसर पर BPR&D के महानिदेशक श्री आलोक मित्तल ने कहा कि “पुलिसिंग में बीट ही बेसिक है।” उन्होंने कहा कि बीट पुलिसिंग की महत्ता को देखते हुए डीजीपी/आईजीपी कांफ्रेंस-2025 की सिफारिशों के आधार पर यह पहल की जा रही है।

उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के निर्देशों की अनुपालना में गोवा के बाद राजस्थान पुलिस के साथ यह दूसरा एमओयू है। BPR&D राजस्थान पुलिस के साथ मिलकर बीट पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन, प्रशिक्षण सामग्री और प्रभावी क्रियान्वयन ढांचा उपलब्ध कराएगा।
श्री मित्तल ने कहा कि इस तरह के एमओयू के माध्यम से राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेज को साझा करने और उनसे सीखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने राजस्थान पुलिस के बीट क्लस्टर कॉन्सेप्ट की भी सराहना की।
धरातल पर दिखाई देगा बदलाव : राजीव कुमार शर्मा
पुलिस महानिदेशक राजस्थान श्री राजीव कुमार शर्मा ने बीट पुलिसिंग को पुलिस और आमजन के बीच सबसे महत्वपूर्ण संपर्क बिंदु बताते हुए इसे अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि अब बीट पुलिसिंग को परंपरागत कार्यप्रणाली तक सीमित न रखते हुए तकनीक के सहयोग से इसे और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, जिसका असर सीधे धरातल पर दिखाई देगा।
डीजीपी ने चंडीगढ़ की बीट बुक प्रैक्टिस की सराहना करते हुए इसे अपनाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि यह एमओयू बीट पुलिसिंग को अधिक व्यवस्थित, जवाबदेह, जनसहभागी, सूचना आधारित और तकनीक-सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे अपराध की रोकथाम, पुलिस-जन संवाद और स्थानीय स्तर पर पुलिस की प्रभावशीलता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
9 जिलों में पहले लागू होगी नई बीट प्रणाली
एमओयू के तहत प्रथम चरण में प्रत्येक रेंज से एक-एक, कुल 9 जिलों का चयन किया गया है। इनमें सीकर, जयपुर उत्तर, धौलपुर, डीडवाना-कुचामन, कोटा शहर, डूंगरपुर, चूरू, जैसलमेर और जोधपुर पश्चिम शामिल हैं।
प्रथम चरण में प्राप्त अनुभवों, उपलब्धियों और नवाचारों के आधार पर नवीन बीट प्रणाली को प्रदेश के अन्य जिलों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत बीट संरचना को जनसंख्या, अपराध की स्थिति, भौगोलिक परिस्थितियों और शहरी-ग्रामीण स्वरूप के आधार पर अधिक तार्किक बनाया जाएगा। बीट स्तर पर हॉटस्पॉट, संवेदनशील स्थानों, महत्वपूर्ण संस्थानों और स्थानीय आवश्यकताओं की पहचान कर जियो-मैप्ड बीट प्रोफाइल तैयार किए जाएंगे।
पुलिस और जनता के बीच मजबूत होगा संवाद
नई बीट व्यवस्था में सामुदायिक सहभागिता को विशेष महत्व दिया जाएगा। कम्युनिटी लाइजन ग्रुप (CLG), पुलिस मित्र और अन्य सामुदायिक माध्यमों को मजबूत किया जाएगा।
इसके साथ ही ‘नो योर बीट ऑफिसर’ जैसी पहल के माध्यम से पुलिस और आमजन के बीच नियमित संवाद को संस्थागत स्वरूप दिया जाएगा। विद्यार्थियों, वरिष्ठ नागरिकों तथा कमजोर एवं संवेदनशील वर्गों के साथ लक्षित संवाद पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
बीट बुक, विलेज क्राइम नोट बुक, डिजिटल बीट प्रोफाइल और अपराध एवं हॉटस्पॉट मैपिंग के माध्यम से स्थानीय सूचनाओं के कानूनसम्मत संग्रह, सत्यापन और उपयोग की व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा।
राजकॉप ई-बीट बुक होगी और मजबूत
तकनीक आधारित बीट पुलिसिंग के लिए राजकॉप ई-बीट बुक की क्षमताओं को और विकसित किया जाएगा। इसमें आवश्यकता के अनुसार GPS, जियो-टैगिंग, QR आधारित सुविधाएं, डिजिटल दस्तावेजीकरण और डैशबोर्ड जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं का उपयोग किया जाएगा।
इससे बीट स्तर पर पुलिसकर्मियों की गतिविधियों की निगरानी, सूचनाओं का अपडेट और अधिकारियों द्वारा पर्यवेक्षण अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।
KPI के आधार पर होगी बीट पुलिसिंग की समीक्षा
नई व्यवस्था में बीट पुलिसिंग की प्रभावशीलता की समीक्षा Key Performance Indicators (KPI) के आधार पर की जाएगी। बीट से लेकर पुलिस थाना, जिला/कमिश्नरेट और राज्य स्तर तक संरचित रिपोर्टिंग व्यवस्था विकसित की जाएगी।
बेहतर कार्य करने वाली बीट टीमों और अच्छे नवाचारों का दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा, ताकि सफल प्रयोगों को अन्य क्षेत्रों में लागू किया जा सके।
प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर रहेगा फोकस
बीट अधिकारियों और पर्यवेक्षण अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रारंभिक प्रशिक्षण, रिफ्रेशर प्रशिक्षण, ट्रेनर्स की ट्रेनिंग और कैस्केड ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
राजस्थान पुलिस अकादमी, जयपुर को नोडल प्रशिक्षण संस्थान बनाया गया है। अकादमी सॉफ्ट स्किल्स और ट्रेनर्स की ट्रेनिंग से जुड़े कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
BPR&D देगा विशेषज्ञ मार्गदर्शन, राजस्थान पुलिस संभालेगी संचालन
एमओयू के तहत BPR&D की ओर से सामान्य क्रियान्वयन ढांचा, प्रशिक्षण सामग्री, मॉडल प्रारूप, समीक्षा उपकरण और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।
वहीं, बीट पुलिसिंग की मैदानी एवं परिचालन व्यवस्था, स्थानीय स्तर पर आवश्यक आदेश, मानव संसाधन, लॉजिस्टिक्स, प्रशिक्षण व्यवस्था, तकनीक और परियोजना से जुड़ी अन्य आवश्यकताओं की जिम्मेदारी राजस्थान पुलिस की होगी।
अधिकारियों ने दिया तकनीक आधारित पुलिसिंग पर जोर
कार्यक्रम की शुरुआत में डीजीपी श्री राजीव कुमार शर्मा ने BPR&D के महानिदेशक श्री आलोक मित्तल और डीआईजी डॉ. किरण कंग सिद्धू का स्वागत किया। महानिदेशक पुलिस, कानून एवं व्यवस्था श्री संजय अग्रवाल ने राजस्थान पुलिस की बेस्ट प्रैक्टिसेज की जानकारी दी।
उप महानिरीक्षक पुलिस, क्राइम ब्रांच श्री दीपक भार्गव ने राजस्थान में वर्तमान बीट पुलिसिंग व्यवस्था एवं उसकी कार्यप्रणाली पर प्रस्तुतीकरण दिया। वहीं BPR&D की उप महानिरीक्षक, नेशनल पुलिस मिशन डॉ. किरण कंग सिद्धू ने बीट पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए तैयार कार्ययोजना और BPR&D के सहयोग पर प्रस्तुतीकरण दिया।
इस अवसर पर महानिदेशक पुलिस, कानून एवं व्यवस्था श्री संजय अग्रवाल, महानिदेशक पुलिस, यातायात श्रीमती मालिनी अग्रवाल सहित पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में महानिरीक्षक पुलिस (क्राइम) श्री शरत कविराज ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके बाद BPR&D के अधिकारियों को स्मृति चिह्न भेंट किए गए।

