साइबर ठगी के पीड़ितों के लिए राहत भरी खबर: राजस्थान पुलिस (R4C) लाई ‘मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल’ (MRM), बिना कोर्ट के चक्कर काटे सीधे बैंक खाते में लौटेगी ठगी की रकम..

साइबर ठगी के पीड़ितों के लिए राहत भरी खबर: राजस्थान पुलिस (R4C) लाई ‘मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल’ (MRM), बिना कोर्ट के चक्कर काटे सीधे बैंक खाते में लौटेगी ठगी की रकम..

गौरव रक्षक/राजेंद्र शर्मा

जयपुर 16 अक्टूबर2026

महानिदेशक पुलिस राजस्थान श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार साइबर ठगी के पीड़ितों को राहत दिलाने और उनके बैंक खातों में होल्ड या फ्रीज की गई धनराशि वापस करवाने के लिए राजस्थान पुलिस की साइबर शाखा आर4सी द्वारा मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) के माध्यम से कार्रवाई की जा रही है। इस मॉड्यूल के जरिए राजस्थान पुलिस अब तक 8,016 आवेदनों पर कार्रवाई कर 5.67 करोड़ रुपये की वापसी के लिए बैंकों को निर्देश दे चुकी है।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री वीके सिंह ने बताया है कि एमआरएम के माध्यम से फ्रीज की गई धनराशि की वापसी की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है। इसका उद्देश्य पात्र पीड़ितों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनकी रकम वापस दिलाने में मदद करना है, ताकि उन्हें अनावश्यक रूप से अदालतों और बैंकों के चक्कर न लगाने पड़ें।
क्या है मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल?
मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत I4C द्वारा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शुरू किया गया ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है। इसकी आधिकारिक वेबसाइट mrm-ncrp.mha.gov.in है। इसके माध्यम से साइबर वित्तीय धोखाधड़ी में होल्ड या फ्रीज की गई राशि की वापसी के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।
धनवापसी की तीन श्रेणियां
● श्रेणी-1 : किसी एक बैंक खाते में फ्रीज राशि ₹50,000 तक हो, तो एफआईआर या न्यायालय के आदेश की आवश्यकता नहीं है। पुलिस रिपोर्ट और इंडेम्निटी बॉण्ड के आधार पर धनवापसी होगी।
● श्रेणी-2: कुल फ्रीज राशि ₹50,000 से अधिक हो, लेकिन किसी एक बैंक खाते में ₹50,000 से अधिक न हो, तो एफआईआर या न्यायालय के आदेश की जरूरत नहीं है। पुलिस रिपोर्ट के आधार पर धनवापसी होगी।
● श्रेणी-3 : किसी एक बैंक खाते में फ्रीज राशि ₹50,000 से अधिक हो, तो एफआईआर दर्ज कराना अनिवार्य है। एफआईआर के बाद शेष प्रक्रिया एमआरएम पोर्टल के माध्यम से पूरी होगी।
ऐसे काम करता है एमआरएम मॉड्यूल
1. पीड़ित 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराता है और उसे एक्नॉलेजमेंट नंबर मिलता है।
2. शिकायत मिलने पर बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता और अन्य वित्तीय संस्थाएं सीएफसीएफआरएमएस के जरिए संदिग्ध खाते की राशि होल्ड करती हैं, ताकि अपराधी पैसा न निकाल सके।
3. राशि होल्ड होने पर पीड़ित एमआरएम पोर्टल पर “Raise Refund Request” के जरिए आवेदन कर सकता है। इसमें शिकायत संख्या, ओटीपी सत्यापन और बैंक खाता विवरण देना होता है।
4. रिफंड रिक्वेस्ट संबंधित जांच अधिकारी या पुलिस थाने को भेजी जाती है, जो शिकायत, बैंक ट्रेल और होल्ड राशि का सत्यापन करता है।
5. पुलिस संदिग्ध खाताधारक को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांग सकती है और जवाब के लिए समय दिया जाता है। संतोषजनक जवाब न देने या उपस्थित न होने पर आगे की कार्रवाई की जाती है।
6. जांच में राशि पीड़ित की पाई जाने और जांच के लिए रोकना आवश्यक न होने पर पुलिस बीएनएसएस की धारा 106 (3) के तहत धनवापसी की अनुशंसा कर सकती है।
7. पुलिस आदेश या जांच रिपोर्ट मिलने के बाद बैंक राशि पीड़ित के खाते में ट्रांसफर करता है और स्थिति एनसीआरपी-सीएफसीएफआरएमएस पर अपडेट करता है।
नागरिकों से अपील
यह पूरी प्रक्रिया 100% निःशुल्क, सुरक्षित और पारदर्शी है। धनवापसी का झांसा देने वाले किसी भी दलाल, एजेंट या अनधिकृत व्यक्ति को कोई भुगतान न करें। साइबर ठगी की घटना होने पर तुरंत निकटतम पुलिस थाने, साइबर पुलिस थाने, साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in, साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 / 9257510100 पर सूचना दें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *