यातायात नियमों की पालना से ही सुरक्षित होंगी सड़कें, जागरूकता में आमजन की भागीदारी जरूरी..डीजी ट्रैफिक मालिनी अग्रवाल ने एमएनआईटी की कार्यशाला में दिया सड़क सुरक्षा पर जोर..

यातायात नियमों की पालना से ही सुरक्षित होंगी सड़कें, जागरूकता में आमजन की भागीदारी जरूरी..डीजी ट्रैफिक मालिनी अग्रवाल ने एमएनआईटी की कार्यशाला में दिया सड़क सुरक्षा पर जोर..

एडीजी डॉ. बी.एल. मीणा बोले—यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए पुलिस और जनता को मिलकर करना होगा प्रयास

गौरव रक्षक/ राजेंद्र शर्मा

जयपुर, 5 अक्टूबर2026

सड़क सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि सुरक्षित यातायात व्यवस्था के लिए आमजन की जागरूकता और सक्रिय भागीदारी भी बेहद जरूरी है। यातायात नियमों की पालना और जिम्मेदार सड़क व्यवहार से ही सड़कों को सुरक्षित और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाया जा सकता है। यह बात डीजी ट्रैफिक मालिनी अग्रवाल ने सोमवार को मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनआईटी), जयपुर में ट्रैफिक पुलिस के लिए आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला के समापन सत्र में कही।

डीजी ट्रैफिक ने कहा कि सड़क सुरक्षा को लेकर केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों में नियमों के प्रति जागरूकता पैदा करना और उन्हें अपने दैनिक व्यवहार में शामिल करना भी जरूरी है। उन्होंने आमजन से यातायात नियमों का पालन करने तथा यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में पुलिस का सहयोग करने की अपील की।

यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने पर एडीजी ने दिया जोर

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में राजस्थान यातायात पुलिस के एडीजी डॉ. बी.एल. मीणा ने प्रदेश में यातायात व्यवस्था को और अधिक सुगम एवं प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों की सख्ती से पालना के साथ-साथ आमजन को भी सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक होना होगा।

एमएनआईटी के अमृत सेंटर ऑफ अर्बन प्लानिंग एंड कैपेसिटी बिल्डिंग की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में प्रदेश के 26 से अधिक पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में पुलिस अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों ने आधुनिक यातायात प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

तकनीक से लेकर दुर्घटना प्रबंधन तक हुआ मंथन

कार्यशाला में यातायात प्रबंधन एवं विनियमन, इंटरसेक्शन एवं कॉरिडोर मैनेजमेंट, ट्रैफिक कंट्रोल डिवाइस, यातायात की गति कम करने के उपाय, पैदल यात्रियों एवं अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा तथा अतिक्रमण प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

विशेषज्ञों ने सड़क सुरक्षा प्रबंधन एवं ऑडिट, इवेंट एवं आपातकालीन यातायात प्रबंधन, यातायात नियमों में संशोधन, तकनीक आधारित प्रवर्तन, दुर्घटना प्रबंधन, आपातकालीन देखभाल और त्वरित प्रतिक्रिया जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षण एवं जानकारी साझा की।

इसके साथ ही ट्रैफिक डेटा के विश्लेषण, सिमुलेशन एवं केस आधारित प्रशिक्षण, यातायात शिक्षा एवं जागरूकता तथा व्यावसायिक सुरक्षा एवं तनाव प्रबंधन जैसे विषयों को भी कार्यशाला में शामिल किया गया।

आधुनिक तकनीक के साथ बेहतर यातायात प्रबंधन पर जोर

कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बदलते शहरी परिवेश और लगातार बढ़ते यातायात दबाव के बीच आधुनिक तकनीक और डेटा आधारित प्रबंधन को अपनाना आवश्यक है। विशेषज्ञों ने पुलिस अधिकारियों को यातायात संबंधी समस्याओं की पहचान, उनके वैज्ञानिक समाधान तथा दुर्घटनाओं की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया।

कार्यशाला के समापन अवसर पर एमएनआईटी के अमृत सेंटर के टीम लीडर प्रो. नंद कुमार ने कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी प्रतिभागियों एवं विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया।

सड़क सुरक्षा का संदेश स्पष्ट है—नियमों का पालन पुलिस के डर से नहीं, बल्कि अपनी और दूसरों की जिंदगी की सुरक्षा के लिए किया जाना चाहिए। पुलिस और आमजन की साझी जिम्मेदारी से ही सुरक्षित सड़कों का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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