CSAM को ऑनलाइन खोजना, देखना या शेयर करना गंभीर अपराध, राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी..

CSAM को ऑनलाइन खोजना, देखना या शेयर करना गंभीर अपराध, राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी..

साइबर क्राइम ब्रांच R4C ने जारी किए दिशा-निर्देश, नागरिकों से ऐसी सामग्री को आगे प्रसारित नहीं करने और तुरंत रिपोर्ट करने की अपील

गौरव रक्षक/राजेंद्र शर्मा

जयपुर, 7 अक्टूबर 2026

राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच (R4C) ने बच्चों के यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार से संबंधित सामग्री यानी चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज मटेरियल (CSAM) को लेकर आमजन के लिए महत्वपूर्ण जनहित एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बच्चों से संबंधित ऐसी अवैध सामग्री को ऑनलाइन खोजना, देखना, बनाना, डाउनलोड करना या शेयर करना कानूनन गंभीर और दंडनीय अपराध है।

महानिदेशक पुलिस राजस्थान राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार जारी एडवाइजरी में अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वीके सिंह ने आमजन को आगाह करते हुए कहा कि CSAM सामान्य एडल्ट कंटेंट नहीं है, बल्कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से संबंधित सामग्री है। ऐसी सामग्री का निर्माण और प्रसार बच्चों के अधिकार, निजता और गरिमा का गंभीर उल्लंघन है।

ऐसी सामग्री को देखना या शेयर करना अपराध के चक्र को बढ़ावा देता है

एडीजी साइबर क्राइम ने बताया कि इंटरनेट पर CSAM को सर्च करना, देखना या डाउनलोड करना ऐसी अवैध सामग्री की मांग को बढ़ाता है। इससे अपराधियों को बच्चों के शोषण के लिए प्रोत्साहन और अवसर मिल सकता है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी परिस्थिति में ऐसी सामग्री को आगे प्रसारित न करें।

पुलिस के अनुसार, डिजिटल माध्यमों पर की जाने वाली गतिविधियों के तकनीकी साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए किसी व्यक्ति को अनजाने में ऐसी सामग्री प्राप्त होने पर उसे आगे भेजने, सेव करने या प्रसारित करने के बजाय तत्काल संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसी को इसकी सूचना देनी चाहिए।

CSAM मिलने पर क्या करें?

राजस्थान पुलिस ने नागरिकों को निम्न सावधानियां बरतने की सलाह दी है—

⚫ इंटरनेट या सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री दिखाई देने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
⚫ जरूरत के अनुसार पोर्टल पर उपलब्ध गुमनाम रिपोर्टिंग विकल्प का इस्तेमाल किया जा सकता है।
⚫ जांच में सहायता के लिए संबंधित URL, यूजरनेम और घटना का समय जैसी आवश्यक जानकारी उपलब्ध रखें।
⚫ बच्चों को सेफ टच और अनसेफ टच के बारे में जागरूक करें।
⚫ बच्चों को इंटरनेट पर अजनबियों के साथ फोटो या निजी जानकारी साझा नहीं करने के लिए समझाएं।
⚫ किसी भी सहायता या शिकायत के लिए साइबर हेल्पलाइन 1930 अथवा बाल हेल्पलाइन 1098 से संपर्क करें।

क्या न करें?

पुलिस ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ऐसी तस्वीर, वीडियो या लिंक को किसी व्यक्ति अथवा सोशल मीडिया ग्रुप में फॉरवर्ड या शेयर न करें। ऐसी सामग्री का स्क्रीनशॉट लेकर उसे अपने मोबाइल, कंप्यूटर या क्लाउड स्टोरेज में सेव करने से भी बचें।

पुलिस ने नागरिकों से यह भी अपील की है कि वे स्वयं कानून हाथ में लेने या संबंधित व्यक्ति से विवाद करने के बजाय मामले की सूचना तत्काल पुलिस या साइबर क्राइम अधिकारियों को दें।

इन माध्यमों से करें शिकायत

यदि किसी नागरिक के सामने CSAM से संबंधित मामला आता है, तो इसकी सूचना निकटतम पुलिस थाना, साइबर पुलिस स्टेशन या राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से दी जा सकती है।

इसके अतिरिक्त साइबर अपराध संबंधी सहायता के लिए 1930 तथा राजस्थान पुलिस द्वारा जारी विशेष साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर संपर्क किया जा सकता है।

राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि ऐसी सामग्री को नजरअंदाज न करें। समय पर की गई एक जिम्मेदार रिपोर्ट किसी बच्चे को आगे होने वाले शोषण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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