डिजिटल अरेस्ट के नाम पर रिटायर्ड अधिकारी से 2.12 करोड़ रुपये की ठगी, महाराष्ट्र से जिम ट्रेनर गिरफ्तार..

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर रिटायर्ड अधिकारी से 2.12 करोड़ रुपये की ठगी, महाराष्ट्र से जिम ट्रेनर गिरफ्तार..

राजस्थान पुलिस की सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की कार्रवाई, मामले में अब तक 7 आरोपी गिरफ्तार

गौरव रक्षक/ राजेंद्र शर्मा

जयपुर, 17 अक्टूबर2026

राजस्थान में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी के एक बड़े मामले में राजस्थान पुलिस की सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने महाराष्ट्र के ठाणे से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि साइबर ठगों ने जयपुर निवासी भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के सेवानिवृत्त अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) को पुलिस और अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बनकर डराया तथा मनी लॉन्ड्रिंग और गिरफ्तारी का भय दिखाकर उनसे कुल 2 करोड़ 12 लाख 10 हजार रुपये ठग लिए। इस मामले में अब तक सात आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर साइबर अपराधों, विशेषकर डिजिटल अरेस्ट के मामलों में प्रभावी कार्रवाई के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह ने बताया कि पीड़ित ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी।

फर्जी गिरफ्तारी वारंट भेजकर बनाया दबाव

पुलिस के अनुसार, 9 अगस्त से 18 अगस्त 2026 के बीच अज्ञात व्यक्तियों ने मोबाइल फोन और व्हाट्सएप कॉल के जरिए पीड़ित से संपर्क किया। आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी और अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर कहा कि उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है तथा गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने की धमकी भी दी गई।

आरोपियों ने पीड़ित को लगातार वीडियो कॉल पर रहने, लाइव लोकेशन चालू रखने और किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क नहीं करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही व्हाट्सएप पर फर्जी सरकारी पत्र और गिरफ्तारी वारंट भेजकर भय का माहौल बनाया गया। बैंक खातों की जांच के नाम पर रकम ट्रांसफर करने का दबाव डाला गया।

डर के कारण पीड़ित ने 13 अगस्त को ICICI बैंक के एक खाते में 2 करोड़ 2 लाख रुपये और 18 अगस्त को YES बैंक के एक खाते में 10 लाख 10 हजार रुपये RTGS के माध्यम से जमा कराए। इस तरह कुल 2 करोड़ 12 लाख 10 हजार रुपये की साइबर ठगी हुई।

टेलीग्राम चैनल के जरिए साइबर अपराधियों के संपर्क में आया आरोपी

जांच के दौरान पुलिस ने बैंक खातों, KYC दस्तावेजों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), व्हाट्सएप चैट और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। इसमें महाराष्ट्र के ठाणे जिले के उल्हासनगर निवासी रवि जितेंद्र प्रसाद सिंह उर्फ अजय सिंह उर्फ देवा की भूमिका सामने आई।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी टेलीग्राम पर संचालित ‘BRO PAY’ चैनल के जरिए साइबर अपराध में शामिल लोगों के संपर्क में आया था। पैसों के लालच में उसने कथित तौर पर बैंक खातों की व्यवस्था करने, अन्य आरोपी को होटल में ठहराने तथा सिम कार्ड, मोबाइल फोन और बैंकिंग दस्तावेजों को संभालने में सहयोग किया।

जांच में सामने आया कि आरोपी ने उल्हासनगर स्थित होटल कमल रेजिडेंसी में एक अन्य आरोपी रोहित रेवन कटकधोंड के ठहरने की व्यवस्था में मदद की और उसकी निगरानी भी की। उसने अपनी पहचान छिपाकर ‘देवा’ नाम का इस्तेमाल किया तथा संपर्क के लिए अलग सिम कार्ड का उपयोग किया।

पुलिस के अनुसार, आरोपी ने पार्सल के माध्यम से मोबाइल फोन और 20 हजार रुपये प्राप्त किए। उसने मोबाइल में एक APK फाइल इंस्टॉल की तथा बैंक खाते से संबंधित सिम कार्ड, चेकबुक और अन्य दस्तावेज अपने पास रखे। बैंकिंग संबंधी जानकारी व्हाट्सएप के जरिए साझा करने और विभिन्न खातों में धनराशि के लेन-देन में भी उसकी भूमिका सामने आई। इन गतिविधियों के बदले आरोपी को कमीशन मिलने का आरोप है।

महाराष्ट्र से गिरफ्तार कर जयपुर लाया गया आरोपी

पुलिस ने आरोपी को महाराष्ट्र से गिरफ्तार कर ट्रांजिट वारंट के जरिए जयपुर लाया है। मामले में ठगी की रकम किन-किन बैंक खातों में भेजी गई और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसका पता लगाने के लिए जांच जारी है। पुलिस व्हाट्सएप रिकॉर्ड, CDR, CAF, IPDR और बैंकिंग लेन-देन की मनी ट्रेल का विश्लेषण कर रही है।

यह कार्रवाई उपमहानिरीक्षक पुलिस, साइबर क्राइम शान्तनु कुमार सिंह के निर्देशन में तथा सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के थानाधिकारी गजेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने की। टीम में पुलिस निरीक्षक सोनम, कांस्टेबल किशन लाल और कांस्टेबल दीपक कुमार शामिल रहे।

पुलिस की आमजन से अपील: डिजिटल अरेस्ट के झांसे में न आएं

राजस्थान पुलिस ने आमजन को आगाह किया है कि कोई भी पुलिस या सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को डिजिटल रूप से गिरफ्तार नहीं करती। यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, NIA, ATS, ED या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी का भय दिखाए और पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाए, तो सतर्क रहें।

पुलिस ने सलाह दी है कि अनजान व्यक्तियों के साथ OTP, ATM PIN, पासवर्ड, बैंक स्टेटमेंट और KYC दस्तावेज साझा न करें। किसी अनजान व्यक्ति की भेजी APK फाइल या संदिग्ध ऐप डाउनलोड न करें। कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता, सिम कार्ड, चेकबुक या बैंकिंग दस्तावेज किसी दूसरे व्यक्ति को उपलब्ध न कराएं।

साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। राजस्थान पुलिस की साइबर हेल्पडेस्क के नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

पुलिस का संदेश: डरें नहीं, सतर्क रहें और किसी भी दबाव में पैसे ट्रांसफर करने से पहले सत्यापन जरूर करें।

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