डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी, बाड़मेर निवासी आरोपी गिरफ्तार..

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी, बाड़मेर निवासी आरोपी गिरफ्तार..

पुलिस, ATS, NIA और RBI के अधिकारी बनकर दंपती को डराया, फर्जी दस्तावेज और वीडियो कॉल के जरिए की ठगी

गौरव रक्षक/ राजेंद्र शर्मा

जयपुर, 15 अक्टूबर,2026

राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर दो करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी के मामले में कार्रवाई करते हुए बाड़मेर निवासी एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर साइबर ठगी की रकम अपने बैंक खाते में प्राप्त करने, उसे निकालने और अन्य आरोपियों को सौंपने में भूमिका निभाने का आरोप है। इस प्रकरण में अब तक चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

महानिदेशक पुलिस राजस्थान श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार साइबर अपराधों, विशेषकर डिजिटल अरेस्ट के मामलों में प्रभावी कार्रवाई के लिए अभियान चलाया जा रहा है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री विजय कुमार सिंह ने बताया कि इस मामले में ठगों ने पुलिस अधिकारी और ATS अधिकारी बनकर परिवादिया तथा उनके पति को गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाया था।

फर्जी अधिकारी बनकर किया वीडियो कॉल

पुलिस के अनुसार, 17 अगस्त 2026 को परिवादिया को फोन कर एक व्यक्ति ने स्वयं को पुलिस इंस्पेक्टर बताया और उनके खिलाफ वारंट जारी होने की बात कही। इसके बाद कथित ATS अधिकारियों के नाम पर वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की गई। आरोपियों ने दंपती को आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराने वाले व्यक्तियों की सूची में नाम होने तथा उनके बैंक खाते का संदिग्ध लेन-देन में इस्तेमाल होने की बात कहकर डराया।

आरोपियों ने पुलिस, ATS, NIA, RBI, भारत सरकार और सुप्रीम कोर्ट के नाम, पद एवं पहचान का कथित दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेज, स्क्रीनशॉट तथा सरकारी और बैंकिंग प्रमाण-पत्र बताकर सामग्री व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजी। दंपती को लगातार वीडियो कॉल पर रहने और आरोपियों के निर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर किया गया। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर उनसे अलग-अलग बैंक खातों में दो करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर करवा ली गई।

बैंक खाते में रकम आने पर आरोपी तक पहुंची पुलिस

इस संबंध में परिवादिया ने 11 सितंबर 2026 को जयपुर में रिपोर्ट दर्ज करवाई। जांच के दौरान पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), व्हाट्सऐप चैट, बैंक खातों के स्टेटमेंट, KYC दस्तावेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। जांच में ठगी की रकम विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर होने की जानकारी सामने आई।

इन्हीं खातों में बाड़मेर निवासी तगाराम के बैंक खाते में भी ठगी की रकम प्राप्त होने के साक्ष्य मिलने पर उसे गिरफ्तार किया गया।

10 हजार रुपये कमीशन के बदले उपलब्ध कराया बैंक खाता

पुलिस के अनुसार, आरोपी तगाराम पुत्र मेहाराम ने अपने परिचित के कहने पर भारतीय स्टेट बैंक की सिणधरी शाखा स्थित अपने बैंक खाते का विवरण उपलब्ध करवाया था। 20 अगस्त 2026 को उसके खाते में दो लाख रुपये आने के बाद आरोपी ने चेक के माध्यम से 1 लाख 90 हजार रुपये और एटीएम से 10 हजार रुपये निकाले तथा यह रकम अन्य आरोपी को सौंप दी। इसके बदले उसे 10 हजार रुपये कमीशन मिलने की बात सामने आई है।

आरोपी ने बैंक ऑफ इंडिया में स्थित अपने दूसरे खाते का विवरण भी उपलब्ध करवाया था। जांच में उसकी भूमिका बैंक खातों की जानकारी देने, रकम निकालने और निकाली गई राशि अन्य आरोपियों को सौंपने के रूप में सामने आई है।

साइबर ठगी के नेटवर्क की जांच जारी

पुलिस मामले में व्हाट्सऐप और टेलीग्राम रिकॉर्ड, CDR, CAF ID, IPDR तथा बैंकिंग लेन-देन की मनी ट्रेल का तकनीकी विश्लेषण कर रही है। ठगी की रकम आगे किन-किन खातों में स्थानांतरित हुई और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी विस्तृत जांच जारी है।

यह कार्रवाई उपमहानिरीक्षक पुलिस साइबर क्राइम श्री शान्तनु कुमार सिंह के निर्देशन तथा उप अधीक्षक पुलिस एवं थाना प्रभारी श्री गजेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में गठित केंद्रीय साइबर क्राइम पुलिस थाना, राजस्थान जयपुर की टीम ने की। टीम में पुलिस निरीक्षक श्री राधेश्याम, कांस्टेबल श्री कृष्ण कुमार, कांस्टेबल श्री लक्ष्मण और कांस्टेबल श्री धर्मेंद्र कुमार शामिल रहे।

आमजन के लिए पुलिस की एडवाइजरी

राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति स्वयं को पुलिस, ATS, NIA, ED या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी का भय दिखाए, वीडियो कॉल पर निगरानी रखे अथवा बैंक खाते में रकम जमा कराने या ट्रांसफर करने का दबाव बनाए, तो उसके झांसे में न आएं।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सरकारी एजेंसियां व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के माध्यम से तथाकथित डिजिटल अरेस्ट कर रकम ट्रांसफर करने के निर्देश नहीं देती हैं। किसी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, PIN, CVV, बैंक पासवर्ड या UPI PIN जैसी गोपनीय जानकारी साझा न करें। दबाव में आकर अपना बैंक खाता, ATM कार्ड, चेकबुक, UPI ID या SIM किसी अन्य व्यक्ति को न दें। अनजान लिंक पर क्लिक करने और बिना सत्यापन के रिमोट एक्सेस एप्लीकेशन इंस्टॉल करने से भी बचें।

संदिग्ध कॉल या संदेश मिलने पर मोबाइल नंबर, बातचीत, बैंक लेन-देन और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखें। साइबर ठगी होने पर तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर पुलिस स्टेशन में सूचना दें। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930, साइबर क्राइम पोर्टल https://cybercrime.gov.in अथवा साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 / 9257510100 पर संपर्क करें।

पुलिस का संदेश: सतर्क रहें, डरें नहीं—सत्यापन करें। किसी भी दबाव में धनराशि ट्रांसफर न करें।

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