मानगढ़ धाम को अविलंब राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाए : वनवासी कल्याण आश्रम

मानगढ़ धाम को अविलंब राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाए : वनवासी कल्याण आश्रम

केन्द्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक में प्रस्ताव पारित, मानगढ़ के इतिहास को पाठ्य-पुस्तकों में शामिल करने की भी मांग

गौरव रक्षक/ राजेंद्र शर्मा

भीलवाड़ा, 2 अक्टूबर2026

अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के केन्द्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक में मानगढ़ धाम को अविलंब राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग को लेकर महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया। 30 सितंबर को भीलवाड़ा में आयोजित बैठक में पारित प्रस्ताव क्रमांक-8 में केंद्र सरकार से मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने तथा इसके ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के अनुरूप संरक्षण और विकास सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया।

आश्रम ने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज के योगदान और बलिदानों का गौरवशाली इतिहास रहा है। इसी क्रम में संत गोविंद गुरु के नेतृत्व में चलाए गए भगत आंदोलन और 17 नवंबर 1913 को मानगढ़ धाम पर हुए जनजातीय नरसंहार को स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल किया जाना चाहिए।

प्रस्ताव में कहा गया कि मानगढ़ की घटना 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड से छह वर्ष पूर्व हुई थी। आश्रम के अनुसार, 17 नवंबर 1913 को मानगढ़ पहाड़ी पर ब्रिटिश शासन की गोलीबारी में बड़ी संख्या में जनजातीय महिला, पुरुष और बच्चे मारे गए थे। इस घटना ने राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के जनजातीय क्षेत्रों में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध स्वतंत्रता आंदोलन की भावना को और मजबूत किया।

इतिहास में मिले उचित स्थान

केन्द्रीय कार्यकारी मंडल ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद जनजातीय समाज के बलिदानों और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका को इतिहास और पाठ्य-पुस्तकों में अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया। इसलिए मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देने के साथ-साथ इसके गौरवशाली इतिहास को राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश के स्कूल-कॉलेजों की पाठ्य-पुस्तकों में उचित स्थान दिए जाने की आवश्यकता है।

प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 नवंबर 2022 को मानगढ़ धाम का दौरा किया था और यहां के बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी। वहीं, राष्ट्रपति ने भी 4 अक्टूबर 2024 को मानगढ़ धाम पहुंचकर जनजातीय समाज के बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी।

आश्रम ने बताया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा भी मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में मान्यता देने की संस्तुति की जा चुकी है। आयोग द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सेवानिवृत्त निदेशक डॉ. धर्मवीर शर्मा के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय दल ने अगस्त 2022 में मानगढ़ धाम के ऐतिहासिक महत्व और बलिदानों का अध्ययन कर शोध आधारित रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी।

संरक्षण और विकास की मांग

केन्द्रीय कार्यकारी मंडल ने भारत सरकार से मांग की कि मानगढ़ धाम को बिना और विलंब किए राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाए तथा इसके ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के अनुरूप संरक्षण और विकास कार्य किए जाएं। साथ ही राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश की सरकारों से भी इस दिशा में सहयोग करने का आग्रह किया गया।

आश्रम ने सामाजिक-धार्मिक नेताओं और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से अपील की कि जनजातीय समाज की अस्मिता और गौरव से जुड़े इस विषय पर सभी मतभेदों से ऊपर उठकर सामूहिक प्रयास किए जाएं।

भीलवाड़ा में 300 से अधिक पदाधिकारी होंगे शामिल

बैठक के बाद 2 और 3 अक्टूबर को भीलवाड़ा के रामेश्वर भवन में देशभर के प्रांत पदाधिकारियों की व्यापक बैठक आयोजित की जा रही है। इसमें 300 से अधिक पदाधिकारियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

पत्रकार वार्ता में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तेची गुबिन, संयुक्त महामंत्री विष्णुकांत जी तथा राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद के अध्यक्ष डॉ. थावरचंद डामोर सहित पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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