चेहतों का नहीं, प्रतिभाओं का हो चयन : लाडो स्पोर्ट्स एकेडमी,  स्कूली खेलों में पारदर्शिता की मांग, जिला कलेक्टर व जिला शिक्षा अधिकारी से निष्पक्ष चयन व्यवस्था लागू करने का आग्रह..

चेहतों का नहीं, प्रतिभाओं का हो चयन : लाडो स्पोर्ट्स एकेडमी,

स्कूली खेलों में पारदर्शिता की मांग, जिला कलेक्टर व जिला शिक्षा अधिकारी से निष्पक्ष चयन व्यवस्था लागू करने का आग्रह

गौरव रक्षक/राजेंद्र शर्मा

भीलवाड़ा, 19अगस्त 2026

स्कूली खेल प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों के चयन को लेकर लाडो स्पोर्ट्स एकेडमी ने पारदर्शी एवं निष्पक्ष व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई है। एकेडमी के अध्यक्ष अधिवक्ता लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने जिला कलेक्टर एवं जिला शिक्षा अधिकारी से आग्रह किया कि आगामी स्कूली खेल प्रतियोगिताओं में प्रत्येक खिलाड़ी को समान अवसर दिया जाए, ताकि प्रतिभावान विद्यार्थियों के साथ किसी प्रकार का अन्याय न हो।

राठौड़ ने कहा कि खिलाड़ी महीनों तक कड़ी मेहनत और अभ्यास करते हैं। ऐसे में केवल दो-तीन दिन के प्रदर्शन के आधार पर किसी खिलाड़ी के भविष्य का निर्णय करना हमेशा न्यायसंगत नहीं हो सकता। खराब मौसम, चोट, मैदान की स्थिति या मानसिक दबाव जैसी परिस्थितियों के कारण खिलाड़ी किसी दिन अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पाए तो इसका अर्थ यह नहीं कि उसकी प्रतिभा कम है।

उन्होंने मांग की कि खिलाड़ियों के चयन में निरंतर प्रदर्शन, तकनीकी कौशल, फिटनेस, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण को भी आधार बनाया जाए। साथ ही चयन प्रक्रिया की वीडियोग्राफी अनिवार्य करने, चयन के स्पष्ट मापदंड पहले से घोषित करने तथा योग्य तकनीकी विशेषज्ञों को चयन समिति में शामिल करने की व्यवस्था की जाए।

एकेडमी ने हितों के टकराव से बचने तथा खिलाड़ियों और अभिभावकों की शिकायतों के लिए निष्पक्ष अपील व्यवस्था बनाने की भी मांग की। राठौड़ ने कहा कि पारदर्शी चयन प्रक्रिया से खिलाड़ियों और अभिभावकों का विश्वास बढ़ेगा और चयनकर्ताओं पर लगने वाले अनावश्यक आरोपों से भी बचा जा सकेगा।

उन्होंने प्रतियोगिताओं में ड्यूटी पर लगाए जाने वाले शारीरिक शिक्षकों, निर्णायकों एवं अन्य कर्मचारियों की वास्तविक मैदान पर उपस्थिति सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी जताई। साथ ही ग्रामीण एवं छोटे विद्यालयों के खिलाड़ियों को समान अवसर देने की मांग करते हुए कहा कि प्रतिभा केवल बड़े विद्यालयों और शहरों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी अनेक खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की क्षमता रखते हैं।

अधिवक्ता राठौड़ ने स्पष्ट किया कि एकेडमी की मांग किसी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध नहीं है, बल्कि खेल व्यवस्था को मजबूत और विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से है। उन्होंने कहा, “खिलाड़ी किसी का चहेता नहीं, देश की प्रतिभा है। मैदान किसी की जागीर नहीं, प्रतिभा की परीक्षा है। चयन किसी की कृपा नहीं, योग्यता का सम्मान है।”

उन्होंने जिला प्रशासन से खेल प्रतियोगिताओं से पूर्व स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर निष्पक्ष चयन और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

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