एमजी अस्पताल में प्रसूताओं की मौतों से मचा हड़कंप, जांच समिति गठित; संक्रमण की आशंका से प्रशासन का इनकार..
गौरव रक्षक/राजेंद्र शर्मा
भीलवाड़ा, 12जुलाई 2026
महात्मा गांधी अस्पताल के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय (एमसीएच) में हाल के दिनों में प्रसूताओं की लगातार हो रही मौतों ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। नवजीवन को जन्म देने आई माताओं की असामयिक मृत्यु ने न केवल उनके परिजनों को गहरे शोक में डुबो दिया है, बल्कि आमजन के मन में भी अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर अनेक सवाल खड़े कर दिए हैं। इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। जिला कलेक्टर ने स्वयं अस्पताल पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और चिकित्सा अधिकारियों से विस्तृत जानकारी लेकर मरीजों की सुरक्षा एवं उपचार व्यवस्था की समीक्षा की।

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरुण गौड़ ने बताया कि प्रसूताओं की मौतों के प्रत्येक मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच के लिए विशेषज्ञों की एक समिति गठित कर दी गई है। समिति प्रत्येक मामले की माइक्रो लेवल पर जांच करेगी, जिससे मृत्यु के वास्तविक कारणों का वैज्ञानिक एवं तथ्यात्मक विश्लेषण किया जा सके। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी प्रकार का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
डॉ. गौड़ ने जानकारी दी कि 29 जून को प्राप्त कल्चर रिपोर्ट के बाद पूरी सावधानी बरतते हुए अस्पताल के एक ऑपरेशन थिएटर को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम केवल एहतियात के तौर पर उठाया गया है ताकि किसी भी संभावित जोखिम को रोका जा सके। अस्पताल में कुल 22 सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट सेट उपलब्ध हैं, जिनमें से प्रत्येक ऑपरेशन में केवल एक सेट का ही उपयोग किया जाता है। उपयोग के बाद प्रत्येक सेट को निर्धारित वैज्ञानिक प्रक्रिया के अनुसार पूरी तरह स्टरलाइज करने के बाद ही पुनः इस्तेमाल में लिया जाता है।

उन्होंने बताया कि 29 जून के बाद संक्रमण नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अस्पताल में चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए ग्रासरूट स्तर तक प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं सेमिनार आयोजित किए गए हैं। संक्रमण नियंत्रण से जुड़े सभी राष्ट्रीय मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी आशंका को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
चिकित्सा अधीक्षक ने अस्पताल में संक्रमण के कारण प्रसूताओं की मौत होने की आशंका से स्पष्ट रूप से इनकार किया। उन्होंने कहा कि अब तक किसी भी जांच में यह प्रमाणित नहीं हुआ है कि मौतों का कारण अस्पताल में फैला संक्रमण है। प्रत्येक मामले का विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा अलग-अलग अध्ययन किया जा रहा है और अंतिम निष्कर्ष केवल जांच रिपोर्ट के आधार पर ही सामने आएगा।
डॉ. गौड़ ने कहा कि महात्मा गांधी अस्पताल जिले का सबसे बड़ा सरकारी चिकित्सालय है, जहां प्रतिदिन हजारों मरीज उपचार के लिए आते हैं और वर्षों से लोगों का इस संस्थान पर गहरा विश्वास बना हुआ है। अस्पताल प्रशासन इस विश्वास को बनाए रखने के लिए पूरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य कर रहा है। यदि जांच के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही, नियमों की अनदेखी अथवा जिम्मेदारी में कमी सामने आती है तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
इधर, लगातार हुई इन मौतों के बाद आमजन की निगाहें अब जांच समिति की रिपोर्ट पर टिक गई हैं। परिजनों सहित जिलेवासियों की अपेक्षा है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी हो तथा यदि किसी प्रकार की चूक सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई कर भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जाए। जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा हर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाया जाएगा।

