डबरा नवग्रह मंदिर प्राणप्रतिष्ठा: आस्था, सामाजिक समरसता और समकालीन विमर्श का संगम
संत दाती महाराज दीक्षा से पूर्व मदन मेघवाल नाम से जाने जाते थे
गौरव रक्षक/राजेंद्र शर्मा
डबरा (मध्यप्रदेश)। 26 फ़रबरी 2026 ,मध्यप्रदेश के डबरा स्थित नवग्रह मंदिर में आयोजित प्राणप्रतिष्ठा समारोह इन दिनों सामाजिक और धार्मिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस अनुष्ठान का संचालन शनिदेव के भक्त संत दाती महाराज ने किया, जबकि यजमान के रूप में प्रदेश के वरिष्ठ नेता Dr. Narottam Mishra और उनका परिवार उपस्थित रहा। आयोजन को कई लोग सनातन परंपरा में सामाजिक समरसता के उदाहरण के रूप में देख रहे हैं।
आयोजन की पृष्ठभूमि
जानकारी के अनुसार, संत दाती महाराज दीक्षा से पूर्व मदन मेघवाल नाम से जाने जाते थे और राजस्थान के मेघवाल समाज से आते हैं, जो अनुसूचित जाति वर्ग में शामिल है। साधना और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के माध्यम से उन्होंने धार्मिक क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। डबरा के नवग्रह मंदिर में उनकी अगुवाई में संपन्न प्राणप्रतिष्ठा समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी रही।
इस आयोजन की विशेष चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि जहां एक ओर संत दाती महाराज ने वैदिक विधि-विधान के साथ अनुष्ठान का संचालन किया, वहीं दूसरी ओर ब्राह्मण परिवार से आने वाले डॉ. मिश्रा ने यजमान की भूमिका निभाई। इसे सामाजिक भूमिकाओं के पारंपरिक ढांचे से आगे बढ़ते हुए सहयोग और सहभागिता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
परंपरा और ऐतिहासिक संदर्भ
भारतीय परंपरा में कर्म और ज्ञान को जन्म से ऊपर स्थान देने के अनेक उदाहरण मिलते हैं। Valmiki द्वारा रचित Ramayana आज भी व्यापक श्रद्धा का ग्रंथ है। इसी प्रकार Vyasa द्वारा रचित Mahabharata और Bhagavata Purana भारतीय संस्कृति की आधारशिला माने जाते हैं।
भक्ति काल में Mirabai और उनके गुरु Ravidas का संबंध भी सामाजिक सीमाओं से परे आध्यात्मिक स्वीकार्यता का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
इतिहास में Chanakya और Chandragupta Maurya की जोड़ी, सामाजिक-सांस्कृतिक गतिशीलता और योग्यता आधारित नेतृत्व का उदाहरण मानी जाती है।
सामाजिक सुधार के क्षेत्र में Raja Ram Mohan Roy और Madan Mohan Malaviya ने शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन को नई दिशा दी। मालवीय द्वारा स्थापित Banaras Hindu University आज भी विविध पृष्ठभूमि के छात्रों को शिक्षा प्रदान कर रहा है।
स्वतंत्रता संग्राम में Mangal Pandey जैसे साधारण पृष्ठभूमि से आए व्यक्तित्वों ने भी असाधारण भूमिका निभाई।
विश्लेषण: सामाजिक समरसता या प्रतीकात्मक संदेश?
डबरा का यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि वर्तमान सामाजिक विमर्श के संदर्भ में एक प्रतीकात्मक घटना के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब जातीय पहचान और सामाजिक विभाजन पर बहस तेज होती रहती है, यह कार्यक्रम सहयोग और साझा धार्मिक भागीदारी का संदेश देता है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक समरसता के वास्तविक अर्थ तभी पूर्ण होते हैं जब यह सहभागिता केवल प्रतीकात्मक आयोजनों तक सीमित न रहकर शिक्षा, अवसर और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में भी समान रूप से परिलक्षित हो।
डबरा नवग्रह मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा का आयोजन आस्था और सामाजिक सहभागिता के मेल का उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह घटना सनातन परंपरा में कर्म, ज्ञान और भक्ति को महत्व देने की अवधारणा को रेखांकित करती है। साथ ही, यह समकालीन समाज के लिए यह प्रश्न भी छोड़ जाती है कि क्या ऐसी पहलें व्यापक सामाजिक परिवर्तन का आधार बनेंगी या केवल प्रतीकात्मक संदेश तक सीमित रहेंगी।
फिलहाल, यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता की बहस में एक महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में देखा जा रहा है।

