राजस्थान में बदलेगा पुलिसिंग का अंदाज: थाने में फरियादी से वैसा ही व्यवहार करें, जैसा खुद के लिए चाहते हैं…
डीजीपी राजीव कुमार शर्मा का संदेश—अपराधियों पर सख्ती, आमजन के प्रति संवेदनशीलता ही पुलिसिंग का मूल मंत्र
‘पॉजिटिव बिहेवियर इन पुलिसिंग’ प्रशिक्षण से पुलिसकर्मियों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने की पहल
गौरव रक्षक/राजेंद्र शर्मा
जयपुर, 15 अक्टूबर2026
पुलिस की पहचान केवल अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से ही नहीं, बल्कि आमजन के साथ उसके व्यवहार से भी बनती है। थाने में शिकायत लेकर आने वाले व्यक्ति की बात संवेदनशीलता से सुनना, उसे सम्मान देना और कानून के दायरे में राहत दिलाने का प्रयास करना पुलिस की जिम्मेदारी है। इसी सोच को मजबूत करने के उद्देश्य से राजस्थान पुलिस ने पुलिसिंग के तौर-तरीकों में सकारात्मक बदलाव लाने की पहल की है। इस पहल का मूल संदेश है—आमजन के प्रति संवेदनशीलता और अपराधियों के प्रति सख्ती, यही प्रभावी पुलिसिंग की पहचान है।
इसी उद्देश्य से गुरुवार को जयपुर स्थित आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी परिसर में तीन दिवसीय ‘पॉजिटिव बिहेवियर इन पुलिसिंग’ प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ महानिदेशक पुलिस, राजस्थान श्री राजीव कुमार शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर किया। 17 अक्टूबर तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में 35 पुलिसकर्मी भाग ले रहे हैं। विशेषज्ञों के साथ संवाद, केस स्टडी, भूमिका-अभिनय और समूह चर्चा के माध्यम से पुलिसकर्मियों को नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया जा रहा है।
‘थाने में वैसा व्यवहार करें, जैसा खुद के लिए अपेक्षा करते हैं’
डीजीपी श्री राजीव कुमार शर्मा ने पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि राजस्थान पुलिस के आमजन के प्रति संवेदनशील व्यवहार और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चर्चा देशभर के पुलिस अधिकारियों के बीच होती है। इस सकारात्मक और पेशेवर छवि को बनाए रखना सभी पुलिसकर्मियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि आमजन अपनी समस्याओं और परेशानियों के समाधान की उम्मीद लेकर थाने पहुंचते हैं। ऐसे में पुलिसकर्मियों का दायित्व है कि वे उनकी बात ध्यानपूर्वक सुनें और विधिक प्रक्रिया के तहत राहत दिलाने का प्रयास करें। संवेदनशीलता का अर्थ कानून के प्रति नरमी बरतना नहीं, बल्कि कानून के दायरे में रहते हुए पीड़ित को न्याय दिलाने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई करना है।
डीजीपी ने पुलिसकर्मियों से कहा कि वे स्वयं को शिकायतकर्ता की जगह रखकर सोचें कि यदि वे किसी परेशानी में थाने पहुंचें, तो पुलिस से कैसा व्यवहार चाहते हैं। आमजन के साथ भी ठीक वैसा ही सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने थानों के वातावरण को सकारात्मक बनाने, कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने और पुलिस के प्रति आमजन का विश्वास मजबूत करने पर जोर दिया।
सख्त कार्रवाई के साथ संवेदनशील व्यवहार भी जरूरी
डीजीपी श्री शर्मा ने कहा कि पुलिसकर्मियों को लंबी ड्यूटी, त्वरित निर्णय लेने की आवश्यकता और लगातार बदलती चुनौतियों के बीच काम करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में स्पष्ट संवाद, सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार, संयम और कानून के प्रति प्रतिबद्धता बेहद आवश्यक हैं। आज पारदर्शिता के दौर में पुलिस का आचरण आमजन की नजर में रहता है, इसलिए प्रत्येक पुलिसकर्मी का व्यवहार विभाग की छवि को प्रभावित करता है।
उन्होंने प्रशिक्षण में शामिल पुलिसकर्मियों से अपने अनुभव साझा करने और ऐसे सफल उदाहरण सामने लाने का आह्वान किया, जिनसे पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनहितकारी बनाया जा सके।
पूर्व डीजीपी ने बताया आत्मचिंतन का मंच
कार्यक्रम में पूर्व डीजीपी डॉ. एम.के. देवराजन ने कहा कि यह प्रशिक्षण केवल सीखने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का मंच भी है। प्रतिभागियों को खुलकर अपने विचार रखने चाहिए, क्योंकि सामूहिक चिंतन से ही सुधार के नए रास्ते निकलते हैं। उन्होंने पुलिस सुधारों के लिए पूर्व में किए गए प्रयासों की जानकारी भी दी।
कार्यक्रम में एचआरडी रिसर्च फाउंडेशन के चेयरमैन अपूर्व कुमार ने स्वागत संबोधन दिया, जबकि विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. पी.आर. सोढाणी ने आभार व्यक्त किया।
दबाव में संयम और संवाद पर होगा विशेष जोर
प्रशिक्षण के दूसरे दिन शुक्रवार को ‘दबाव की परिस्थितियों में पुलिसिंग’ विषय पर चर्चा होगी। इसमें कार्यस्थल के तनाव को समझने, भावनात्मक परिस्थितियों में संयम बनाए रखने, प्राथमिकताएं तय करने और नागरिकों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा। नाराज शिकायतकर्ताओं से संवाद और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के लिए भूमिका-अभिनय तथा समूह अभ्यास भी कराए जाएंगे।
तीसरे दिन शनिवार को ‘सीख से सकारात्मक पुलिसिंग की ओर’ विषय के तहत प्रशिक्षण से प्राप्त सीख को व्यवहार में उतारने पर जोर रहेगा। इसमें सक्रिय रूप से सुनने, प्रभावी संवाद, सकारात्मक व्यवहार और नागरिकों के साथ विश्वासपूर्ण संबंध विकसित करने के व्यावहारिक उपायों पर काम किया जाएगा। समापन पर प्रतिभागियों की व्यक्तिगत और इकाई स्तर की कार्ययोजनाएं तैयार की जाएंगी, ताकि प्रशिक्षण का असर पुलिसकर्मियों के दैनिक कार्यों में दिखाई दे सके।
पुलिसिंग में बदलाव की असली कसौटी थाने में व्यवहार
राजस्थान पुलिस की इस पहल का उद्देश्य स्पष्ट है—पुलिस और आमजन के बीच संवाद की दूरी कम हो, शिकायतकर्ता को सम्मान मिले और कानून के प्रति भरोसा मजबूत हो। प्रशिक्षण की वास्तविक सफलता तब सामने आएगी, जब थाने पहुंचने वाले प्रत्येक व्यक्ति को उसकी बात सुने जाने, उचित मार्गदर्शन मिलने और निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद महसूस होगी।
संदेश साफ है—वर्दी की ताकत कानून के पालन में है और पुलिस की प्रतिष्ठा आमजन के विश्वास में। अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के साथ पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता ही ऐसी पुलिसिंग का आधार है, जो जनता को सुरक्षा का भरोसा दे और पुलिस-जन संबंधों को मजबूत बनाए।

