विदेशी मुद्रा और नौकरी का झांसा देकर लाखों की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश: सेंट्रल साइबर पुलिस स्टेशन (R4C) ने आरोपी को गुड़गांव से किया गिरफ्तार…
सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर बुजुर्गों को बनाते थे शिकार; फर्जी कस्टम रसीदों और मनी लॉन्ड्रिंग सर्टिफिकेट के नाम पर ऐंठे 22 लाख रुपये
गौरव रक्षक/राजेंद्र शर्मा
जयपुर ,9 अक्टूबर 2026,
विदेशी मुद्रा, विदेश में नौकरी और भारत आने का झांसा देकर जयपुर निवासी से 22 लाख रुपये की साइबर ठगी करने के मामले में राजस्थान पुलिस के सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन (R4C) ने एक आरोपी को हरियाणा के गुरुग्राम से गिरफ्तार किया है। आरोपी ने अपने तीन बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे दूसरे खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया। उसके खातों में परिवादी से ठगी गई करीब 4.12 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई थी।
महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर साइबर अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री विजय कुमार सिंह ने बताया कि मामले में गिरफ्तार आरोपी की पहचान वसीम हुसैन निवासी बरेली, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है। पुलिस अब ठगी की रकम के लेन-देन और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
फेसबुक पर विदेशी महिला बनकर शुरू की बातचीत
घटना के अनुसार जयपुर निवासी परिवादी ने शिकायत दी कि 3 मई 2024 को फेसबुक के माध्यम से उसकी बातचीत दिओंन मार्ले नाम की महिला से शुरू हुई। महिला ने स्वयं को अमेरिका का निवासी और इंग्लैंड के मैनचेस्टर स्थित एक फार्मास्यूटिकल कंपनी में अकाउंटेंट बताया। बातचीत के दौरान उसने परिवादी के पुत्र को विदेश में नौकरी दिलाने तथा स्वयं भारत आने का भरोसा दिलाया।
इसके बाद कथित महिला और उसके साथियों ने एयरपोर्ट कस्टम शुल्क, मनी लॉन्ड्रिंग सर्टिफिकेट, आयकर, लाउंजिंग चार्ज और विदेशी मुद्रा को भारतीय खाते में ट्रांसफर करने जैसी अलग-अलग वजह बताकर रकम मांगी। विश्वास जीतने के लिए व्हाट्सऐप पर फर्जी पासपोर्ट, एयर टिकट, विदेशी बैंक की रसीद, मास्टर कार्ड तथा कस्टम और आयकर विभाग से संबंधित कूटरचित दस्तावेज भेजे गए।
सरकारी अधिकारी बनकर भी करते रहे बात
जांच के अनुसार गिरोह के अन्य सदस्य अलग-अलग व्यक्तियों और सरकारी अधिकारियों का रूप धारण कर परिवादी से फोन पर बात करते थे। वे स्वयं को कस्टम और अन्य विभागों का अधिकारी बताकर विभिन्न बैंक खातों में रकम जमा करवाते रहे। इस तरह परिवादी से कुल 22 लाख रुपये जमा करवाए गए।
जब परिवादी ने आगे रकम देने से इनकार किया तो आरोपियों ने उसके घर का पता होने का हवाला देकर जान से मारने की धमकी दी और उसे भयभीत कर दोबारा रकम जमा करवाने का प्रयास किया। यह गिरोह सोशल मीडिया के माध्यम से विशेष रूप से वृद्ध और अकेले रहने वाले व्यक्तियों को निशाना बनाता था।
तीन बैंक खातों से ठगी की रकम आगे पहुंचाई
अनुसंधान में सामने आया कि आरोपी वसीम हुसैन ने अपने तीन बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे दूसरे खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया। उसके खातों में परिवादी से ठगी गई करीब 4.12 लाख रुपये की राशि आई, जिसे आगे अन्य खातों में भेजा गया अथवा एटीएम के माध्यम से निकाला गया।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने अपने चचेरे भाइयों मुर्सद हुसैन और अर्सद हुसैन के कहने पर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाए तथा उनके एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और लिंक्ड मोबाइल सिम उन्हें सौंपे। आरोप है कि इसके बदले उसे 70 हजार रुपये कमीशन देने का लालच दिया गया था। इन खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त रकम जमा करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया गया।
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गुरुग्राम में दबिश
पुलिस टीम ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), व्हाट्सऐप चैट, बैंक खातों के स्टेटमेंट, केवाईसी दस्तावेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। जांच के दौरान आरोपी के बैंक खातों एवं मोबाइल फोन से जुड़े विवरणों की पड़ताल की गई। उसकी बदलती लोकेशन की निगरानी के बाद पुलिस टीम ने गुरुग्राम में दबिश देकर उसे गिरफ्तार किया।
उप महानिरीक्षक पुलिस साइबर क्राइम श्री शान्तनु कुमार सिंह के निर्देशन में, सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के थानाधिकारी एवं पुलिस उप अधीक्षक श्री गजेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया। टीम में पुलिस निरीक्षक अजय कुमार शर्मा, कांस्टेबल सुभाष कुमार, भीवाराम और कांस्टेबल चालक सुबेसिंह शामिल रहे।
मामले में व्हाट्सऐप एवं टेलीग्राम रिकॉर्ड, सीडीआर, सीएएफ, आईपीडीआर और बैंकिंग लेन-देन की मनी ट्रेल का तकनीकी विश्लेषण जारी है। ठगी की रकम किन-किन खातों में पहुंची और नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसका पता लगाया जा रहा है।

