नाबालिक बच्चों को दो पहिया और चार पहिया वाहन वेद्यड्राइविंग लाइसेंस के अभाव में बिल्कुल नहीं चलाना चाहिए, पूरा परिवार खतरे में आ जाता है..

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नाबालिक बच्चों को दो पहिया और चार पहिया वाहन वेद्यड्राइविंग लाइसेंस के अभाव में बिल्कुल नहीं चलाना चाहिए, पूरा परिवार खतरे में आ जाता है

गौरव रक्षक, 23 मई

एडवोकेट ✍🏻 अशोक जैन एडवोकेट

पिता बार-बार कहते थे मत चलाओ वाहन, मत जाओ बेवजह होटलों में, अभी तुम नाबालिग हो, लेकिन बेटे ने दोस्तों के चक्कर में पिता की एक न सुनी.. आज पूरा परिवार खतरे में पिता जेल में है l
पुणे में पोर्श कार से दो लोगों को रौंदने वाले नाबालिग आरोपी के पिता को गिरफ्तार कर लिया गया है. ये घटना 18 मई को हुई थी. पुलिस के मुताबिक,
नाबालिग आरोपी घटना के वक्त कथित तौर पर नशे की हालत में था और नाबालिग था।
नशे में उसने अपनी पोर्श कार से बाइक सवार अनीष अवधिया और अश्विनी कोस्टा को टक्कर मार दी, जिससे दोनों की मौत हो गई ।
इस घटना में मारे गए अनीष अवधिया और अश्विनी कोस्टा, दोनों ही 24 साल के थे और मध्य प्रदेश के रहने वाले थे ।दोनों ही पुणे में एक आईटी कंपनी में जॉब करते थे ।
ये घटना पुणे के कल्याणी नगर में हुई थी. पुलिस ने 17 साल के नाबालिग आरोपी को गिरफ्तार किया था. लेकिन जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने कुछ शर्तों के साथ उसे जमानत दे दी थी. जमानत की शर्तों में 300 शब्दों का एक निबंध लिखने की शर्त भी शामिल थी. इसके बाद जब गुस्सा फूटा तो पुलिस हरकत में आई और आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया ।

बेटे की गलती पर पिता कैसे फंस गए ?

आरोपी लड़के का पिता विशाल अग्रवाल एक रियल एस्टेट कारोबारी हैं. पुणे के पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने बताया कि मंगलवार को लड़के के पिता को छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार किया गया था और बुधवार को उन्हें कोर्ट में पेश किया गया जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया जेल।
पुलिस ने इस मामले पिता के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 और 77 के तहत केस दर्ज किया था. इस कानून की धारा 75 बच्चों के प्रति क्रूरता, जबकि धारा 77 बच्चों को नशीले पदार्थों की आपूर्ति करने से जुड़ी है.
पिता पर आरोप है कि उन्हें पता था कि उनके बेटे के पास वैलिड ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है, उसके बावजूद उसे कार दी. इतना ही नहीं, उन्हें ये भी पता था कि उनका बेटा शराब पीता है, तब भी उसे पार्टी में जाने की इजाजत दी.
इस मामले में पुलिस ने आरोपी लड़के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 (गैर-इरादतन हत्या) और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत केस दर्ज किया है.

2019 में हुआ था कानून में संशोधन।

2019 में मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन हुआ था. संशोधन के जरिए नाबालिग अपराधियों के लिए एक अलग से धारा जोड़ी गई थी. इसमें नाबालिगों के अपराध के लिए माता-पिता, गार्जियन या गाड़ी मालिक की जवाबदेही तय की गई थी.
मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199A कहती है कि अगर नाबालिग कोई अपराध करता है तो ऐसे मामले में उसके माता-पिता या गार्जियन या फिर गाड़ी के मालिक को दोषी माना जाएगा.
कानून के मुताबिक, अदालत ये मानकर चलेगी कि नाबालिग को गाड़ी देने में माता-पिता, गार्जियन या गाड़ी मालिक की सहमति थी. ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर तीन साल जेल और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा का प्रावधान है.
इतना ही नहीं, ऐसे मामलों में खुद को निर्दोष साबित करने का सारा जिम्मा माता-पिता, गार्जियन या गाड़ी मालिक पर होता है. उन्हें साबित करना होता है कि नाबालिग ने जो अपराध किया है, उसके बारे में उन्हें कुछ नहीं पता था और उन्होंने ऐसे अपराध को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए थे.

आरोपी लड़के को कुछ नहीं होगा ?

मोटर व्हीकल एक्ट के मुताबिक, जिस गाड़ी से नाबालिग ने अपराध किया है, उसका रजिस्ट्रेशन एक साल के लिए कैंसिल कर दिया जाएगा. इसके साथ ही 25 साल की उम्र होने तक आरोपी को ड्राइविंग लाइसेंस भी जारी नहीं किया जाएगा.
इस मामले में आरोपी नाबालिग है, इसलिए उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हो सकती. हालांकि, पुलिस का कहना है कि इस मामले में वो कोर्ट से नाबालिग पर वयस्क की तरह केस चलाने की अर्जी दाखिल करेगी, क्योंकि ये जघन्य अपराध का मामला बनता है.
दिसंबर 2012 में दिल्ली के निर्भया कांड के बाद कानून में संशोधन किया गया था. इसमें प्रावधान किया गया कि अगर 16 साल या उससे ज्यादा उम्र का कोई किशोर जघन्य अपराध करता है तो उसके साथ वयस्क की तरह बर्ताव किया जाएगा.
अगर आरोपी को नाबालिग मानकर ही मुकदमा चलाया गया तो उसे तीन साल के लिए सुधार गृह भेजा में भेजा जाएगा. लेकिन अगर उसे वयस्क मानकर मुकदमा चलाया जाता है और जेल की सजा होती है, तो भी कानूनन 21 साल तक उसे सुधार गृह में रखा जाएगा और इसके बाद ही जेल में डाला जाता है ।

कोई भी नाबालिग बच्चे जिनके वैद्य ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है वह वाहन दो पहिया और चार पहिया वाले नहीं चलाएंगे ।

थोड़ी सी अवेयरनेस की कमी से पूरा परिवार खतरे में आ गया है ।

आईये,

हम मिलकर राजस्थान में अवेयरनेस पैदा करें और बच्चों को समझाएं और पूरे देश में एक नजीर बनाए ।

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